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गणेश चतुर्थी व्रत कथा
एक बार माता पार्वती स्नान करने जा रही थीं, तो उन्होंने अपने शरीर के मैल से एक बालक बनाया और उसे द्वारपाल के रूप में बैठा दिया।
उन्होंने बालक को आदेश दिया कि जब तक वह स्नान कर रही हैं, किसी को भी अंदर न आने दें।
कुछ समय बाद भगवान शिव आए और उन्होंने अंदर जाने की कोशिश की, लेकिन बालक ने उन्हें रोक दिया।
भगवान शिव क्रोधित हो गए और उन्होंने बालक का सिर काट दिया।
जब माता पार्वती को इस घटना के बारे में पता चला, तो वह बहुत दुखी हुईं।
उन्होंने भगवान शिव से अपने पुत्र को वापस लाने की प्रार्थना की।
भगवान शिव ने अपने गणों को उत्तर दिशा में जाने और पहले जीव का सिर लाने का आदेश दिया।
गणों को एक हाथी का सिर मिला, जिसे भगवान शिव ने बालक के शरीर पर लगा दिया।
इस प्रकार गणेश का जन्म हुआ, जिनका सिर हाथी का था।
माता पार्वती ने गणेश को आशीर्वाद दिया कि उनकी पूजा सबसे पहले की जाएगी, और वह सभी देवताओं में अग्रणी होंगे।
इस प्रकार, गणेश चतुर्थी का त्योहार गणेश के जन्म और उनके हाथी के सिर के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।