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वास्तु शास्त्र

वास्तु शास्त्र दिशाएं
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कमरे के अनुसार दिशा

पूजा कक्ष

ईशान कोण (उत्तर-पूर्व)

पूजा कक्ष हमेशा ईशान कोण में होना चाहिए। यह सबसे शुभ दिशा मानी जाती है।

रसोई

दक्षिण-पूर्व

रसोई दक्षिण-पूर्व दिशा में होनी चाहिए। इस दिशा में अग्नि तत्व का वास होता है।

शयन कक्ष

दक्षिण-पश्चिम

शयन कक्ष दक्षिण-पश्चिम दिशा में होना चाहिए। यह नींद के लिए शुभ माना जाता है।

धन व तिजोरी

उत्तर

धन और तिजोरी उत्तर दिशा में रखनी चाहिए। यह धन वृद्धि के लिए शुभ है।

अध्ययन कक्ष

पूर्व

अध्ययन कक्ष पूर्व दिशा में होना चाहिए। यह ज्ञान और शिक्षा के लिए शुभ है।

बैठक कक्ष

उत्तर-पश्चिम

बैठक कक्ष उत्तर-पश्चिम दिशा में होना चाहिए। यह मेहमानों के लिए शुभ है।

मुख्य दिशा-निर्देश

  • घर का मुख्य द्वार पूर्व, उत्तर या ईशान दिशा में होना चाहिए
  • टॉयलेट दक्षिण-पश्चिम या पश्चिम दिशा में होना चाहिए
  • सीढ़ियां दक्षिण या पश्चिम दिशा में होनी चाहिए
  • पानी का स्रोत उत्तर-पूर्व या पूर्व दिशा में होना चाहिए
  • भारी सामान दक्षिण-पश्चिम में रखना चाहिए
  • खिड़कियां पूर्व और उत्तर दिशा में होनी चाहिए

पूजा की दिशा

पूजा हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुंह करके करनी चाहिए। पूर्व दिशा सूर्योदय की दिशा है और यह सबसे शुभ मानी जाती है।

भोजन की दिशा

भोजन हमेशा पूर्व दिशा की ओर मुंह करके करना चाहिए। यह स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए शुभ माना जाता है।

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