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श्री काली माता चालीसा
॥
दोहा ॥
जय काली कल्याणी माँ, जयति महाकाली।
तेरी दया होवे तो, संकट टल जाए काली ॥
कष्ट हरण मंगल करण, जयति महाकाली।
तेरी कृपा से हो, सबकी रखवाली ॥
॥
चौपाई ॥
जय काली कालिका माता।
जय जगदम्ब शुम्भ की घाता ॥
जय महाकाल कालिका रानी।
तुम हीं हो जग की महारानी ॥1॥
खप्पर हाथ और मुण्डमाल।
तुम ही हो सबकी प्रतिपाल ॥
जयति रक्त बीज को खानी।
जयति चामुण्डा जग कल्याणी ॥2॥
तुम ही हो आदि तुम ही अन्त।
तुम्हीं हो सबकी भाग्य सन्त ॥
तुम्हीं हो काली, तुम्हीं हो तारा।
मुक्त कराती भव से पारा ॥3॥
तुम हीं हो दुर्गा, तुम हीं चण्डी।
तुम हीं हो सबकी संकट खण्डी ॥
भक्त जनों के काज सँवारे।
दुष्टों के तुम प्राण निखारे ॥4॥
सिंह वाहिनी तुम बलकारी।
तुम्हीं हो सबकी संकट हारी ॥
कालरात्रि और भैरवी माता।
तुम्हीं हो सबकी भाग्य विधाता ॥5॥
तुम्हारी महिमा अपरम्पार।
तुम हीं हो सबकी संकट टारणहार ॥
तुम्हीं हो विद्या, तुम्हीं हो बुद्धि।
तुम्हीं हो ज्ञान की देती सिद्धि ॥6॥
तुम्हारा ध्यान जो कोई लगावै।
उसे तुरन्त ही वांछित फल पावै ॥
अति कोमल है हृदय तुम्हारा।
देती सुख-सम्पत्ति अपारा ॥7॥
जो कोई तुम्हे भजे मन लाई।
कभी न होवे उसकी हानि ॥
जय जय जय महाकाल भवानी।
तुम हीं हो सबकी पटरानी ॥8॥
कृपा करो माँ हम पर भारी।
संकट से सबकी रक्षाकारी ॥
तुम्हीं हो देवी, तुम्हीं हो माता।
तुम्हीं हो सबकी भाग्य विधाता ॥
यह चालीसा भक्ति से गावै।
महाकाली की कृपा पावै ॥9॥
॥
दोहा (समापन) ॥
काली चालीसा पढ़े जो, प्रेम से नित गावै।
सब सुख भोगत जगत में, अन्त मुक्ति पद पावै ॥