← Back
श्री बालाजी चालीसा
॥
दोहा ॥
श्री गुरु चरण चितलाय के, धरें ध्यान हनुमान।
बालाजी चालीसा लिखैं, दास स्नेही कल्याण ॥
विश्व विदित वर दानी, संकट हरण हनुमान।
मेहंदीपुर में प्रगट भये, बालाजी भगवान ॥
॥
चौपाई ॥
जय हनुमान बालाजी देवा।
प्रगट भये यहाँ तीनों देवा ॥
प्रेतराज भैरव बलवाना।
कोतवाल कप्तानी हनुमाना ॥1॥
मेहंदीपुर अवतार लिया है।
भक्तों का उद्धार किया है ॥
बाल रूप प्रगटे हैं यहाँ पर।
संकट वाले आते जहाँ पर ॥2॥
डाकिनी शाकिनी अरु जिंदनी।
मशान चुड़ैल भूत भूतनी ॥
जाके भय ते सब भग जाते।
स्याने भोपे यहाँ घबराते ॥3॥
चौकी बंधन सब कट जाते।
दूत मिले आनंद मनाते ॥
सच्चा है दरबार तिहारा।
शरण पड़े सुख पावे भारा ॥4॥
रूप तेज बल अतुलित धामा।
सन्मुख जिनके हैं सिया-रामा ॥
कनक मुकुट मणि तेज प्रकाशा।
सबकी होवत पूर्ण आशा ॥5॥
महंत गणेश पुरी हैं गुणीले।
भये सुसेवक राम रंगीले ॥
अद्भुत कला दिखाई कैसी।
कलयुग ज्योति जलाई जैसी ॥6॥
ऊँची ध्वजा पताका नभ में।
स्वर्ण कलश है उन्नत जग में ॥
धर्म सत्य का डंका बाजे।
सियाराम जय शंकर राजे ॥7॥
आन फिराया मुगदर घोटा।
भूत जिंद पर पड़ते सोटा ॥
राम लक्ष्मण सिय हृदय कल्याणा।
बाल रूप प्रगटे हनुमाना ॥8॥
जय हनुमन्त हठीले देवा।
पुरी परिवार करत है सेवा ॥
लड्डू चूरमा मिश्री मेवा।
अर्जी दरखास्त लगाऊँ देवा ॥9॥
दया करे सब विधि बालाजी।
संकट हरण प्रगटे बालाजी ॥
जय बाबा की जन-जन ऊचारे।
कोटिक जन तेरे आये द्वारे ॥10॥
बाल समय रवि भक्षहि लीन्हा।
तिमिर मय जग कीन्हो तीन्हा ॥
देवन विनती की अति भारी।
छाँड़ दियो रवि कष्ट निहारी ॥11॥
लाँघि उदधि सिया सुधि लाए।
लक्ष्मण हित संजीवन लाए ॥
रामानुज के प्राण दिवाकर।
शंकर सुवन माँ अंजनी चाकर ॥12॥
केसरी नन्दन दुख भव भंजन।
रामानन्द सदा सुख संदन ॥
सिया राम के प्राण प्यारे।
जय बाबा की भक्त ऊचारे ॥13॥
संकट दुख भंजन भगवाना।
दया करहु हे कृपा निधाना ॥
सुमरि बाल रूप कल्याणा।
करे मनोरथ पूर्ण कामा ॥14॥
अष्ट सिद्धि नव निधि दातारी।
भक्त जन आवे बहु भारी ॥
मेवा अरु मिष्टान्न प्रवीना।
भेंट चढ़ावें धनी अरु दीना ॥15॥
जो सत पाठ करे चालीसा।
ता पर प्रसन्न होय बागीसा ॥
कल्याण स्नेही स्नेह से गावे।
सुख समृद्धि रिद्धि सिद्धि पावे ॥16॥
॥
दोहा (समापन) ॥
मन्द बुद्धि मम जानके, क्षमा करो गुण खान।
संकट मोचन क्षमहु मम, दास स्नेही कल्याण॥