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सूर्य देव की आरती
ऊँ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।
जगत् के नेत्र स्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा धरत सब ही तव ध्यान ॥
ऊँ जय सूर्य भगवान...॥
1 ॥
सारथी अरूण हैं प्रभु तुम,श्वेत कमलधारी ।
तुम चार भुजाधारी, अश्व हैं सात तुम्हारे कोटी किरण पसारे,तुम हो देव महान ॥
ऊँ जय सूर्य भगवान...॥
2 ॥
ऊषाकाल में जब तुम,उदयाचल आते ।
सब तब दर्शन पाते, फैलाते उजियारा जागता तब जग सारा, करे सब तब गुणगान ॥
ऊँ जय सूर्य भगवान...॥
3 ॥
संध्या में भुवनेश्वर, अस्ताचल जाते ।
गोधन तब घर आते, गोधुली बेला में हर घर हर आंगन में, हो तव महिमा गान ॥
ऊँ जय सूर्य भगवान...॥
4 ॥
देव दनुज नर नारी, ऋषि मुनिवर भजते ।
आदित्य हृदय जपते, स्त्रोत ये मंगलकारी इसकी है रचना न्यारी,दे नव जीवनदान ॥
ऊँ जय सूर्य भगवान...॥
5 ॥
तुम हो त्रिकाल रचियता, तुम जग के आधार।
महिमा तब अपरम्पार, प्राणों का सिंचन करके,भक्तों को अपने देते, बल बृद्धि और ज्ञान॥
ऊँ जय सूर्य भगवान...॥
6 ॥
भूचर जल चर खेचर, सब के हो प्राण तुम्हीं ।
सब जीवों के प्राण तुम्हीं, वेद पुराण बखाने, धर्म सभी तुम्हें माने, तुम ही सर्व शक्तिमान ॥
ऊँ जय सूर्य भगवान...॥
7 ॥
पूजन करती दिशाएं, पूजे दश दिक्पाल ।
तुम भुवनों के प्रतिपाल, ऋतुएं तुम्हारी दासी, तुम शाश्वत अविनाशी, शुभकारी अंशुमान ॥
ऊँ जय सूर्य भगवान...॥
8 ॥
ऊँ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान ।
जगत के नेत्र रूवरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा, धरत सब ही तव ध्यान ॥
ऊँ जय सूर्य भगवान...॥
9 ॥