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संतोषी माता की आरती
जय संतोषी माता, जय संतोषी माता।
अपने सेवक जन की, सुख सम्पति दाता ॥1॥
जय संतोषी माता...
सुन्दर वरण चतुर्भुजा, धारण कीन्हों।
वेणु फल अरु खड्ग, बाम कर लीन्हों ॥2॥
जय संतोषी माता...
शुक्रवार प्रिय मानत, आज दिवस सोही।
भक्त मण्डली छाई, कथा सुनत मोही ॥3॥
जय संतोषी माता...
गुड़ और चना परम प्रिय, भोग लगावत।
सन्तोष करे तो अम्बे, फल तुरत पावत ॥4॥
जय संतोषी माता...
तुम संतोषी देवी, सन्तोषी नाम सुहावन।
दुःख दरिद्र दरिद्र हरणी, मंगल कलश सजावन ॥5॥
जय संतोषी माता...
तुम जो भक्तन को मानत, उनको सुख देत।
सन्तोषी माता रानी, आशीर्वाद देती ॥6॥
जय संतोषी माता...
आरती जो कोई गावे, प्रेम सहित गावे।
सन्तोषी माता की कृपा, निश्चय ही पावे ॥7॥
जय संतोषी माता...
जय संतोषी माता, जय संतोषी माता।
अपने सेवक जन की, सुख सम्पति दाता ॥8॥
जय माँ संतोषी!