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गंगा मैया की आरती
ॐ जय गंगे माता, श्री जय गंगे माता ॥
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चंद्र सी जोत तुम्हारी, जल निर्मल आता ॥
शरण पडें जो तेरी, सो नर तर जाता ॥
ॐ जय गंगे माता...॥
1 ॥
पुत्र सगर के तारे, सब जग को ज्ञाता ॥
कृपा दृष्टि तुम्हारी, त्रिभुवन सुख दाता ॥
ॐ जय गंगे माता...॥
2 ॥
एक ही बार जो तेरी, शारणागति आता ॥
यम की त्रास मिटा कर, परमगति पाता ॥
ॐ जय गंगे माता...॥
3 ॥
आरती मात तुम्हारी, जो जन नित्य गाता ॥
दास वही सहज में, मुक्त्ति को पाता ॥
ॐ जय गंगे माता...॥
4 ॥
ॐ जय गंगे माता, श्री जय गंगे माता ॥
जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता ॥
ॐ जय गंगे माता...॥
5 ॥