← Back

अम्बे तू है जगदम्बे काली

अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली। तेरे ही गुण गावें भारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥ अम्बे तू है जगदम्बे काली... ॥1॥ तेरे भक्त जनों पर, माता, भीड़ पड़ी है भारी। दानव दल पर टूट पड़ो माँ, करके सिंह सवारी। सौ-सौ सिंहों से भी बलशाली, है दस भुजाओं वाली। दुखियों के दुखड़े निवारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥ अम्बे तू है जगदम्बे काली... ॥2॥ माँ बेटे का है, इस जग में, बड़ा ही निर्मल नाता। बड़ा ही निर्मल नाता, पूत कपूत सुने हैं, पर ना माता सुनी कुमाता। सब पे करुणा दरसाने वाली, अमृत बरसाने वाली। भक्तों के कारज संवारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥ अम्बे तू है जगदम्बे काली... ॥3॥ नहीं मांगते धन और दौलत, ना चाँदी ना सोना। ना चाँदी ना सोना, हम तो मांगे माँ तेरे मन में, एक छोटा सा कोना। सबकी बिगड़ी बनाने वाली, लाज बचाने वाली। सतियों के सत को संवारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥ अम्बे तू है जगदम्बे काली... ॥4॥ अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली। तेरे ही गुण गावें भारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती ॥5॥ जय माता दी!

अधिक आरती संग्रह देखें

←Back